मोदी के सामने बनारस के दिव्यांग अरुण राय को लगा ऐतिहासिक टीका ...आकड़ा 100 करोड़ के पार

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देश ने कोरोना वैक्सीन के 100 करोड़ डोज का आंकड़ा आज सुबह 9.47 बजे पूरा कर इतिहास रच दिया है। 100 करोड़ डोज पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल पहुंचे। वे यहां करीब 20 मिनट रहे। इस दौरान उन्होंने हेल्थकेयर वर्कर्स से बात की। कुछ दिव्यांगों और अस्पताल के सुरक्षाकर्मी और दूसरे स्टाफ से भी बात की। यहां मोदी के सामने ही बनारस के दिव्यांग अरुण राय को 100करोड़वां डोज लगाया गया है। इस उपलब्धि पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी प्रधानमंत्री मोदी, देश के वैज्ञानिकों, हेल्थवर्कर्स और आम लोगों को बधाई दी है।


देश में 16 जनवरी से कोरोना वैक्सीनेशन की शुरुआत हुई थी और आखिरी 20 करोड़ डोज 31 दिन में लगे हैं। बता दें देश की 75% युवा आबादी को कम से कम एक डोज लग चुका है और 31% आबादी को दोनों डोज लग चुके हैं। बता दें दुनिया में सिर्फ चीन ही ऐसा देश है जहां भारत से ज्यादा वैक्सीन लगी हैं। चीन ने 100 करोड़ डोज का आंकड़ा सितंबर में पूरा कर लिया था।

वैक्सीन के 100 करोड़ डोज पूरे होने का ऐलान करने के लिए सरकार ने खास तैयारियां की हैं। इसके लिए ट्रेन, प्लेन और जहाजों पर लाउडस्पीकर से घोषणा की जा रही है। साथ ही 100% वैक्सीनेशन पूरा कर चुके गांवों से कहा गया है कि उन्हें पोस्टर और बैनर लगाकर हेल्थ वर्कर्स का सम्मान करना चाहिए।

देश में 16 जनवरी से वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत हुई। शुरुआती 20 करोड़ वैक्सीन डोज 131 दिन में लगे। अगले 20 करोड़ डोज 52 दिन में दिए गए। 40 से 60 करोड़ डोज देने में 39 दिन लगे। 60 करोड़ से 80 करोड़ डोज देने में सबसे कम, महज 24 दिन लगे।

अब 80 करोड़ से 100 करोड़ होने में 31 दिन लगे हैं। यानी अब रफ्तार कम हो गई है। अगर इसी रफ्तार से वैक्सीनेशन होता रहा तो देश में 216 करोड़ वैक्सीन डोज लगने में करीब 175 दिन और लगेंगे। यानी, 5 अप्रैल 2022 के आसपास ये आंकड़ा हम पार कर सकते हैं।

मास्क फ्री होने के लिए अभी करना होगा इंतजार
हमने भले ही 100 करोड़ डोज लगाने के करीब हैं, लेकिन देश की महज 20% आबादी ही पूरी तरह वैक्सीनेट हुई है। 29% आबादी को वैक्सीन की एक डोज दी जा चुकी है। ऐसे में मास्क फ्री होने के लिए हमें अभी इंतजार करना होगा।

महामारी एक्सपर्ट डॉक्टर चंद्रकांत लहारिया कहते हैं कि जब तक 85% आबादी पूरी तरह वैक्सीनेट नहीं हो जाती तब तक ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। जिन देशों में मास्क से छूट दी गई है वहां जनसंख्या घनत्व भारत की तुलना में काफी कम है। ऐसे में हमें अपनी जरूरतों को हिसाब से ही फैसला लेना चाहिए।